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यादें चार-चांद सफ़र बितानी पुराण दिन कितने हँसकर हमनें अमावस्या ने तो आना ही प्रफुल्लित चार चांद दुख-दर्दकेआँसूतकपीजातेलोग हम ही सुबह पाँच बजे अठारह कहीकिसीरोज दिन, मुसाफ़िर गुमसुमसीहोगईहैजिंदगीखालीमकानसाहैमनमोतियोंसीमुस्कानकोईबिखेरेपंछियोंसाचहकताहैतन जिन्दगी

Hindi चार बजे Quotes